संगणनात्मक चिंतन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर नया पाठ्यक्रम

पाठ्यक्रम: GS2/ शिक्षा

संदर्भ

  • हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की दृष्टि के अनुरूप कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए संगणनात्मक चिंतन (CT) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित नया CBSE पाठ्यक्रम प्रारंभ किया है। यह पाठ्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा।

नया CT–AI पाठ्यक्रम क्या है?

  • यह पहल विद्यार्थियों में संगणनात्मक चिंतन की बुनियादी क्षमताओं जैसे तार्किक तर्क, समस्या-समाधान और पैटर्न पहचान विकसित करने के लिए बनाई गई है।
  • इसे एक अंतरविषयक कौशल के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो गणित, विज्ञान, भाषा एवं सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में समाहित होगा।
  • कक्षा 3–5 में पहेलियाँ, पैटर्न पहचान और पाठ-आधारित गतिविधियों के माध्यम से समस्या-समाधान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • कक्षा 6–8 में AI की अवधारणाएँ, परियोजना-आधारित अधिगम और चिंतनशील मूल्यांकन शामिल होंगे।

नए CT–AI पाठ्यक्रम की आवश्यकता

  • AI साक्षरता का मुख्यधारा में लाना: AI अब दैनिक जीवन का हिस्सा है (सर्च इंजन, अनुशंसा प्रणाली, डिजिटल सहायक)।
    • पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को तकनीक के जागरूक उपयोगकर्ता बनाएगा।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: यह भारत की शिक्षा प्रणाली को सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप बनाता है।
  • तकनीक का नैतिक उपयोग: विद्यार्थियों को AI से जुड़े नैतिक मुद्दों जैसे पक्षपात, गोपनीयता और जवाबदेही से परिचित कराता है। इससे जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता का विकास होता है।

कमजोर बुनियादी साक्षरता (LSRW) पर चिंता

  • सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना (LSRW) उच्च स्तरीय अधिगम के लिए आवश्यक संज्ञानात्मक उपकरण हैं।
    • संगणनात्मक चिंतन भाषा से स्वतंत्र नहीं है; यह पढ़ने की समझ, निर्देशों की व्याख्या और लिखित समाधान पर अत्यधिक निर्भर है।
  • वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट 2024 के अनुसार, सरकारी स्कूलों के 50% से अधिक कक्षा 5 के विद्यार्थी कक्षा 2 स्तर का पाठ नहीं पढ़ सकते।
    • यह मानक 2006 से स्थिर है, जो लगातार अधिगम अंतराल को दर्शाता है।
  • PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 (23 लाख विद्यार्थी, 88,000 स्कूल): शहरी निजी स्कूलों के विद्यार्थी भाषा और गणित में कक्षा 3 स्तर पर ग्रामीण सरकारी स्कूलों से कमजोर पाए गए।

अधिगम सुधार हेतु सरकारी पहल

  • निपुण भारत मिशन: 2026-27 तक प्रत्येक बच्चे को कक्षा 3 तक सार्वभौमिक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता सुनिश्चित करना।
  • समग्र शिक्षा अभियान: पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समान शिक्षा पर बल।
  • निष्ठा कार्यक्रम: विद्यालय प्रमुखों और शिक्षकों की क्षमता-वृद्धि हेतु पहल।
  • डिजिटल पहल: दीक्षा पोर्टल, पीएम ई-विद्या और स्वयम के माध्यम से ई-लर्निंग और शिक्षक प्रशिक्षण।
  • TALA (प्रौद्योगिकी-सहायता प्राप्त अधिगम और मूल्यांकन): AI, अनुकूलनशील मूल्यांकन और डिजिटल उपकरणों के प्रयोग को प्रोत्साहित करना।

आगे की राह

  • AI और संगणनात्मक चिंतन का समावेश भविष्य की आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप एक दूरदर्शी शिक्षा नीति को दर्शाता है। किंतु इसकी सफलता विद्यार्थियों की सुदृढ़ बुनियादी क्षमताओं पर निर्भर करेगी।
  •  अतः पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन को बुनियादी स्तर की अधिगम तैयारी के साथ संरेखित करना आवश्यक है, साथ ही निरंतर मूल्यांकन और प्रतिक्रिया तंत्र द्वारा प्रारंभिक अधिगम अंतराल की पहचान सुनिश्चित करनी होगी।

Source: TH

 

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